दर्द शायरी

दिल को उसकी हसरत से ख़फा कैसे करू,
अपने रब को भूल जाने की ख़ता कैसे करू,
लहू बनकर रग रग मे बस गया है
वो लहू को इस जिस्म से ज़ुदा कैसे करू.दर्द से अब हम खेलना सीख गए;
हम बेवफाई के साथ जीना सीख गए;
क्या बताएं किस कदर दिल टूटा है मेरा;
मौत से पहले, कफ़न ओढ़ कर सोना सीख गए।किसी के दिल का दर्द किसने देखा है;
देखा है, तो सिर्फ चेहरा देखा है;
दर्द तो तन्हाई मे होता है; लेकिन…
तन्हाइयो मे लोगों ने हमे हँसते हुए देखा है!इश्क़ का तेरी एक यही तो सिला हे,
याद तुझे करके मेरा दिल भी जला हे.
तेरी यादो को हम कैसे भुला दे,
सब कुछ हारकर एक यही तो मिला हे.जिनकी हसरत थी उनका प्यार ना मिला,
जिनका बरसो इंतेज़ार किया उनका साथ ना मिला,
अजीब खेल होते हे ये मोहब्बत के,
किसी को हम ना मिले और कोई हमे ना मिला.जब भी करीब आता हूँ बताने के किये;
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये!
महफ़िलों की शान न समझना मुझे;
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये!हमने आंसु को बहोत संजोया कि तन्हाई मे आया करो, भरी महफ़िल मे हमारा मज़ाक ना उड़ाया करो,
इस बात पर आंसु ने तड़प कर कहा,
महफ़िल मे आपको तन्हा आप को पाते हे, इस लिए हम चले आते हे.मिटा सके जो दर्द तेरा वो शब्द कहाँ से लाऊँ…
चूका सकूं एहसान तेरा वो प्राण कहाँ से लाऊँ…
खेद हुआ है आज मुझे लेख से क्या होने वाला…
लिख सकूं मैं भाग्य तेरा वो हाथ कहाँ से लाऊँ…उनकी तस्वीर को सीने से लगा लेते हैं,
इस तरह जुदाई का गम मिटा लेते हैं.
किसी तरह ज़िकार हो जाए उनका,
तो हंसस कर भीगी पलकें झुका लेतेहैं.लोग मिला करते हे ज़िंदगी मे दिल को दर्द देने के लिए,
वो भी आए थे दिल की कहानी सुनने के लिए,
वो हवाओ की तरह रुख़ बदलते रहे,
हम तक़दीर से लड़ते रहे जिनको पाने के लिए.दगा देकर भी हंसते रहते हैं
ऐसे चेहरों के अब तो मौसम आए
आजकल प्यार सरेआम बरसता है
हमारे पास धोखे खाकर कितने आएइश्क़ का तेरी एक यही तो सिला हे,
याद तुझे करके मेरा दिल भी जला हे.
तेरी यादो को हम कैसे भुला दे,
सब कुछ हारकर एक यही तो मिला हे.इश्कवाले आँखो से आँखो की बात समज़ लेते है,
सपने मे मिल जाए तो मुलाकात समज़ लेते है,
रोता तो आसमान भी है अपनी धरती के लिए,
और लोग उनके आंसु को बरसात समज़ लेते है.क्या मजबूरी हे उनकी, जो हम से इतना दूर रहते है,
हम उनको बहुत चाहते है,
पर वो हम से क्यो नही कहते है,
क्यो हम से इतना दूर-दूर रहते है ..निकलके उन्ही के दिल से हम महफ़िल मे आ बैठे हे, हमारी मुश्किल ये हे की बड़ी मुश्किल मे आ गये हे, लड़खड़ाने लगे हे पैर उनकी बेवफ़ाई की चोट से,
पर लोग कहेते हे पी के सारी महफ़िल मे आ गये हे.हर गम सहा तेरे प्यार के खातिर,
हर दीवार तोड़ी तेरे दीदार के खातिर,
हर उमीद मिटा दी तुम्हे पाने की खातिर,
और तुमने दिल तोड़ दिया ज़माने के खातिर.ज़िंदगी से वफ़ा हमने भी की हैं बहुत
पर गमों के सिवा और कुछ मिला भी तो नही,
एक तुझको पाकर बहुत खुश था मैं ,
पर साथ तेरा मंज़िल तक मिला भी तो नही ,।वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है,
ज़ख़्म दिल का ज़ुबान पर आया है,
ना रोते थे कभी काटो की चुभन से,
पर आज ना जाने क्यों फूलों की खुश्बू से रोना आया है.पास आकर दूर चले जाते हो,
हम अकेले है और अकेले ही रह जाते हे.
दिल का दर्द कहे भी तो कैसे कहे,
हमारे अपने ही हमे ज़ख्म देके चले जातें हे.अपनी ज़िंदगी से कुछ पल दे दे मुझे,
आज ना सही तू अपना कल दे दे मुझे,
खुशी दे या ना दे मर्ज़ी तेरी,
अपना दुख और दर्द तू चल दे दे मुझे.क्या मालूम था के इश्क़ करके दिल तोड़ जाएगी,
दिल मे प्यार जगा के मूह मोड़ जाएगी,
ओ बेवफा तू जब भी किसी से दिल लगाएगी,
तो कभी भी चैन की साँसे नही ले पाएगी.एक बार फिर अपने दर्द को हसी मे छुपा रहे हे,
खुश हे ये तन्हाई मे ये भी सबको बता रहे हे.
ना जाने क्यू ये आँखे हर वक़्त बेवफा हो जाती हे,
जो की हर आँसू मे उनकी यादे जाता रही हे.याद मे हमारी आप भी खोए होंगे,
खुली आँखो मे कभी आप भी सोए होंगे,
माना की हसना है अदा गम छुपाने की,
पर हस्ते-हस्ते कभी आप भी रोए होंगे.इस दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दू,
मोहब्बत का उनको पैगाम क्या दू,
इस दिल मे दर्द नही यादे हे उनकी,
अगर यादे मूज़े दर्द दे तो इल्ज़ाम क्या दू.ना करो किसी से मोहब्बत ज़िंदगी मे इतनी,
मोहब्बत का दर्द कभी से नही पाएगा,
जब टूटेगा दिल कोई अपने किसी के हाथो से,
किस ने तोड़ दिया ये भी किसी से कह नही पाएगा.पास आकर दूर चले जाते हो,
हम अकेले हे और अकेले ही रह जाते हे.
दिल का दर्द कहे भी तो कैसे कहे,
हमारे अपने ही हमे ज़ख्म देके चले जातें हे.खुदा से थोडा रहेंम खरीद लेते,
आपके ज़ख्मो का मरहम खरीद लेते,
अगर कभी बिकती खुशिया मेरी,
तो सारी बेचकर आपका गम खरीद लेते.मेरी मोहब्बत में कभी दर्द नहीं था,
पर दिल मेरा कभी बर्बाद नहीं था,
होती रही मेरी आँखों से आंशु के बरसात,
पर उनके लिए आँशु और पानी में फर्क नहीं था.ना होता दर्द तो ये आंशु की कीमत ना होती,
अगर ना होती मोहब्बत इस दुनिया मे,
तो ज़िंगगी जीने की चाहत ना होती,
और ना बंद आँखो को सपनो की आदत होती.प्यार में आँखों तो दिल कि जुबां होती हे,
पर सच्चा प्यार तो सदा बेजुबान होता हे,
प्यार में दर्द भी मिले तो कोई परवाह नहीं करते,
सुना हे दर्द से चाहत और भी जवान होती हे.ना होता दर्द तो ये आंसू की कीमत ना होती,
अगर ना होती मोहब्बत इस दुनिया मे,
तो ज़िंदगी जीने की चाहत ना होती,
और ना बंद आँखो को सपनो की आदत होती.वो बहुत रोई और कहती रही.,कि नफ़रत है तुमसे,
लकिन…एक सवाल आज भी दर्द देता है,कि..
अगर मुझसे नफ़रत ही थी तो,
वो इतना रोई क्यू?जिनकी आँखे आँसू से कभी नम नही,
तुम्हे क्या लगता हे उनको कोई दर्द नही,
तुम तड़प के रो पड़े तो क्या हो गया,
दर्द छुपा के हसने वाले भी कुछ कम नही,,!तुम्हारी यादो के टुकड़े चुनकर,
गुज़रे लम्हो की एक तस्वीर बना लू.
मेरी हर एक खुशी तुम्हारे नाम लिख कर,
तुम्हारे दर्द की अपनी तक़दीर बना लू.तूफान दर्द का चला तो सवार जाऊंगा ,
मे तेरी जुल्फ नही जो यू बिखर जाऊंगा ,
यहा से उड़ूँगा तो ये ना पूछो के कहा जाऊंगा ,
मे तो दरिया हू दोस्तो समुंदर मे समा जाऊंगा .समजते थे हम उनकी हर एक बात को,
वो हर बार हमसे धोका देते थे,
पर हम भी वक़्त के हातो मजबूर थे,
जो हर बार उनको मौका देते थे.आपकी एक आवाज़ सुन ने को तरसता हे दिल,
हर पल जुदाई मे तड़प्ता हे दिल,
ना जाने कब नज़र के सामने आएगे वो,
इस उम्मीद पे हर पल धड़कता हे दिल.नाराज़ होने से पहले खता बता देना,
आँसू निकलने से पहले हसना सीखा देना,
अगर ज़िंदगी मे दूर जाना है तो,
पहले बिना साँस लिए जीना सीखा देना.लोग मिला करते हे ज़िंदगी मे दिल को दर्द देने के लिए,
वो भी आए थे दिल की कहानी सुनने के लिए,
वो हवा ओ की तरह रुख़ बदलते रहे,
हम तक़दीर से लड़ते रहे जिनको पाने के लिए.नही ज़िंदगी मिली हमे ना वफ़ा मिली हमे,
हर खुशी हमसे खफा मिली.
झूठी मुस्कान लिए अपने दर्द छुपाए हे,
सच्चा इश्क़ करने की भी क्या खूब सज़ा मिली.मोहब्बत का मेरा सफर आख़िरी है,
ये कागज, कलम, ये गजल आख़िरी है
मैं फिर ना मिलूंगा कहीं ढूंढ लेना
तेरे दर्द का ये असर आख़िरी है !!खिले गुलाब का मुरझाना बुरा लगता है ,
मोहब्बत का यूँ मर जाना बुरा लगता है …
फ़ासले मिटाना अच्छी बात है ,
पर किसी और का उनके नज़दीक जाना बुरा लगता है,।खाए है लाखो धोखे,
एक धोखा और सह लेंगे.
तू लेजा अपनी डोली को,
हम अपनी अर्थी को बारात कह लेंगे..खुदा ने लिखा ही नही उसको,
मेरी किस्मत मे शायद वरना,
खोया तो बहुत कुछ था मैंने
उसको पाने के लिए..!!!मत कर मेरे दोस्त हसीनो से मोहब्बत
वो आँखो से वार करती हैं
मैने इन्ही आँखो से देखा है की..
वो कितनो से प्यार करती हैंमोहब्बत के भी कुछ राज़ होते है,
जगती आँखों मे भी खाव्ब होते है.
ज़रूरी नही है गम मे ही आँसू आए.
मुस्कुराती आँखो मे भी सैलाब होते है.दिल्लगी में दिल को हम कैसा रोग लगा बैठे,
ज़िंदगी को छोड़ क्यों मौत को गले लगा बैठे,
हुमने समझा था दिल लगाकर दिल को चैन मिलेगा,
ऐसी लगी चोट के दिल को बेदर्द से दर्द लगा बैठे !अक़्स खुश्बू हूँ, बिखरने से ना रोके कोई,
और बिखर जाओं तो मुझको ना समेटे कोई,
काँप उठता हूँ में ये सोच कि…
तन्हाई में मेरे चेहरे पे तेरा नाम ना पढ़ ले कोई..।दर्द -ए- इंतेहा देखो हम तन्हा अर्ज़ कहते हैं
हसी को हाल ना समझो दिखावा-मर्ज़ सहते हैं
तमन्ना दिल की, मर जाए क्या है हर्ज़ कहते हैं
इश्क़ में हम, वफ़ा चाहें लोग ख़ुदग़र्ज़ कहते हैंहोठो की बात ये आँसू कहते है.
चुप रहते है फिर भी बहते है.
इन आँसुओ की किस्मत तो देखिए
ये उनके लिए बहते है जो दिल मे रहते हैतेरे शेर, तेरी दीवानगी का पता देते है
कैसे कह दे कोई कि तुम उसे अच्छे नही लगते
करता नही जो क़द्र ऐसी पाक मोहब्बत की
ऐसे दिल तोड़ने वाले मुझे अच्छे नही लगतेयाद करते हैं तुम्हे तन्हाई में,
दिल डूबा हैं गमो की गहराई में,
हमे मत ढूंदना दुनिया की भीड़ में,
हम मिल्लेंगे तुम्हे तुम्हारी परछाई मे,प्यार और बारिश- दोनो एक जैसे होते है,
वो हमेशा यादगार होते है, फ़र्क सिर्फ़ इतना है की..
बारिश साथ रह कर तन भिगाती है,
और प्यार दूर रहकर आँखे…लोग तो अपना बनाके छोड़ देते है
कितनी आसानी से गैरो से रिश्ता जोड़ लेते है ,
हम तो एक फूल तक न तोड़ सके
कुछ लोग बेरहमी से दिल तोड़ देते है।दर्द का एहसास ना रहा गम था,
जो कुछ ख़ास ना रहे हम भी,
किसी से मिलने को तड़प जाएँगे मालूम ना था.
हम भी मुहब्बत कर जाएँगे मालूम ना था..कभी दर्द इसने दिया कभी दर्द उसने दिया,
ज़ख़्मों को मगर किसी ने भी सीने नही दिया,
आज फरिश्ता कहते हैं सभी मेरे यार मुझको,
मगर इंसानो की तरह कभी जीने नही दिया ।।ऐसे दीवानेपन का इलाज़ कोई करे तो करे कैसे,
डूब के दर्द के समुंदर मे कोई प्यार करे कैसे ।
जिसके किस्मत मे सिवाए गम के कुछ भी नही है, तुम्हारे लिए खुशियों का महल खड़ा करे तो करे कैसे।।कच्चे धागे सा इक झटके मे टूट जाए, ऐसा दिल मुझे मिला है.
उस पर हर गहरा दर्द भी मुझे अपनो से मिला है.
जब-जब बनाना चाहा है किसी को अपना,
तोहफे में टूटा मेरा दिल और बस मीठा सा मुझे दर्द मिला है।।दिल जब टूटता है तो आवाज़ नही आती,
हर किसी को दोस्ती रास नही आती,
यह तो अपने अपने नसीब की बात है,
कोई भूलता ही नही और किसी को याद तक नही आती..तुम रहो आँखों के सामने तो गीत कोई अधूरा रहता नही,
जज़्बात बहते रहते हैं और तुम खुद ग़ज़ल बन जाती हो,
लोग कहते है की मोहब्बत मे सिर्फ़ दर्द ही मिल पाता है,
सच तो ये है की तुम मेरे हर दर्द की दावा बन जाती हो.खाए हैं बहुत धोखे हमने,
बहाएँ हैं बहुत आँसू हुमने,
दर्द का रिश्ता कुछ ऐसा है हमसें ,
की दर्द को सीने से लगाया हमने..।मुझे दफनाने से पहले,
मेरा दिल निकाल कर उसे दे देना,
मैं नही चाहता कि..
वो खेलना छोङ दे !!शायद इस दिल को आराम मिले अब,
मैं सिर्फ़ यही सोच के आया हूँ,
मेरे टूटे दिल के टुकड़ों को..,
मैं अपने हाथों में उठा के लाया हूँ .वफ़ा के वादे वो सारे भुला गयी चुप चाप,
वो मेरे दिल की दीवारें हिला गयी चुप चाप .गहरी थी रात, लेकिन हम खोए नही,
दर्द बहूत था दिल में, लेकिन हम रोए नही,
कोई नही हमारा जो पूछे हमसे,
जग रहे हो किसी के लिए, या किसी के लिए सोए ही नही..!!तुमको छुपा रखा है इन पलको मैं,
पर इन को यह बताना नही आया,
सोते मैं भीग जाती है पलके मेरी,
पलकों को अभी तक दर्द छुपाना नही आयागीली आँखों से उनके मैं थोड़ा पानी लाया हूँ
धड़कते दिल से उनके साँसों की रवानी लाया हूँ,
और लाया हूँ कुछ एहसास उन आँखों से चुरा के,
सुनाने महफ़िल में मोहब्बत की कहानी लाया हूँसब कुछ अपना लूटा ते रहे तेरी चाहत में,
ज़िंदा हैं तुझ पे ये दिल लुटाने के बाद भी.
समंदर ए तन्हाई में डूबा ही रह गया मैं,
प्यार में तुम से दिल लगाने के बाद भी.उसकी ये ज़िद के वो मुझे मार डाले दर्द देकर
और मेरी ये ज़िद है कि मैं उसपे मरता चला गया।।आएँगे वो ज़रूर ये सोचकर इंतज़ार करता हू मैं,
ना आए अगर वो, तो ख़यालो में ही मिल लेता हू मैं,
मुस्कुराए वो तो खुश होता हूँ मैं,
दर्द ज़रा सा भी हो उसे तो,, रोता हू मैं,दिल की ख्वाइश को नाम क्या दू,
प्यार का उसे पैगाम क्या दू,
इस दिल मे दर्द नही उसकी यादे है,
अब यादे ही दर्द दे तो उसे इल्ज़ाम क्या दू.।अब तेरे बिना अकेले रहने को जी करता है
खामोशी से दर्द पीने को जी करता हैदेखा पलट के उस ने चाहत उसे भी थी…
दुनिया से मेरी तरह शिकायत उसे भी थी…
वो रोए थे मुझे परेशान देख कर…
उस दिन पता चला मेरी ज़रूरत उसे भी थी…खुशियो से नाराज़ है मेरी ज़िंदगी,
प्यार की मोहताज़ है मेरी ज़िंदगी,
हंस लेता हू लोगो को दिखाने के लिए,
वरना दर्द की किताब है मेरी ज़िंदगीबंधीशो में, उस तड़पति हुई,
आत्मा का क्या कसूर?
दिल्लगी की इस दिल ने तो,
इन आँसूओं का क्या कसूर?

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